सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा)। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद सहरसा जिले में गौरव और जश्न का माहौल है। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के मठियानी पंचायत के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव खजुरी की बेटी जुली कुमारी ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। जुली ने पूरे राज्य में 94वीं रैंक हासिल कर डीएसपी (DSP) का प्रतिष्ठित पद प्राप्त किया है।
सरकारी स्कूल से की पढ़ाई, कॉलेज में रहीं गोल्ड मेडलिस्ट
जुली कुमारी एक बेहद सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता शंभू मिश्र और पूरे परिवार के लिए यह क्षण ऐतिहासिक है। जुली की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से कक्षा 8वीं तक हुई। इसके बाद उन्होंने गांव से 3 किलोमीटर दूर बलबा बाजार स्थित उच्च विद्यालय से 10वीं की परीक्षा पास की, जहां वह हमेशा अपने वर्ग में प्रथम आती थीं।
आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने रमेश झा महिला कॉलेज, सहरसा से अर्थशास्त्र (Economics) विषय में इंटर और स्नातक (Graduation) की डिग्री ली। इसके बाद सहरसा पीजी कॉलेज से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया, जहां वह यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं और उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया। खास बात यह है कि पीजी तक की पढ़ाई के लिए जुली हर दिन अपने गांव खजुरी से सहरसा आया-जाया करती थीं।
बच्चों को पढ़ाया ट्यूशन, दरोगा परीक्षा में मिली थी असफलता
आर्थिक रूप से सामान्य परिवार होने के कारण जुली ने अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए गांव में ही 10वीं तक के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गईं। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) परीक्षा के सभी चरण पास कर लिए थे, लेकिन शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में असफल रहने के कारण उनका चयन नहीं हो सका। इस असफलता से टूटने के बजाय उन्होंने इसे एक नई सीख माना।
रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ भाई ने भेजा पटना, वर्तमान में हैं 'पेशकार'
जिस समाज में आज भी बेटियों को अकेले घर से बाहर भेजने में संकोच किया जाता है, वहां जुली के भाई मिथुन कुमार मिश्र (जो 2015 से सीआईएसएफ में कार्यरत हैं) ने समाज की परवाह न करते हुए अपनी बहन का पूरा साथ दिया। भाई ने जुली को तैयारी के लिए पटना भेजा और हॉस्टल में रखा।
जुली की मेहनत रंग लाई और उन्होंने दोबारा दरोगा की शारीरिक परीक्षा समेत कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं। वर्ष 2024 में उनका चयन 'पेशकार' के पद पर हुआ, जहां वे वर्तमान में कार्यरत हैं। लेकिन जुली का लक्ष्य बड़ा था, वे पेशकार की नौकरी करते हुए भी रुकी नहीं और दोगुनी मेहनत से बीपीएससी की तैयारी में जुटी रहीं, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।