बिहार:कोसी क्षेत्र अंतर्गत मधेपुरा जिला मुख्यालय में मुहर्रम पर्व के दौरान अमन-चैन और सांप्रदायिक सौहार्द को बरकरार रखने के उद्देश्य से सदर थाना पुलिस द्वारा एक व्यापक फ्लैग मार्च (Flag March) निकाला गया. सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार के नेतृत्व में निकले इस मार्च में भारी संख्या में जिला पुलिस बल, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, दंगा नियंत्रण/गुंडारोधक दल और सशस्त्र वाहिनी के जवान शामिल हुए. मार्च के जरिए जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की और यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी स्तर पर उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
थाना परिसर से शुरू होकर मुख्य जुलूस मार्गों से गुजरा मार्च
मार्च का रूट: फ्लैग मार्च की शुरुआत विधिवत रूप से सदर थाना परिसर से हुई. इसके बाद पुलिस की गाड़ियों का काफिला और पैदल मार्च शहर के सबसे व्यस्त व संवेदनशील इलाकों—मस्जिद चौक, पुरानी बाजार मार्ग और कॉलेज चौक से होते हुए मुख्य पारंपरिक जुलूस मार्ग तक पहुंचा.
पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग: मार्च के दौरान पुलिस वैन पर लगे लाउडस्पीकर (Public Address System) के माध्यम से लगातार वैधानिक नियमों का पालन करने, शांति बनाए रखने और प्रशासनिक शिष्टाचार का परिचय देने का संदेश प्रसारित किया जाता रहा.
सीसीटीवी और सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी, एक्टिव हुआ कंट्रोल रूम
भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) और संभावित सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए मधेपुरा पुलिस ने निम्नलिखित कड़े सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं:
संवेदनशील क्षेत्रों की घेराबंदी: शहर के चिन्हित संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस पिकेट और २४ घंटे गश्ती (Patrolling) की व्यवस्था की गई है.
संदिग्धों की जांच: चौक-चौराहों पर मेटल डिटेक्टर और संदिग्ध सामानों की आकस्मिक जांच के लिए विशेष खोजी टीमों को मुस्तैद किया गया है.
साइबर सेल अलर्ट: सदर थानाध्यक्ष ने बताया कि सोशल मीडिया (जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम) पर धार्मिक उन्माद या गलत सूचनाएं (Afwah) फैलाने वाले ग्रुप एडमिन और उपद्रवी तत्वों पर साइबर सेल के जरिए पैनी नजर रखी जा रही है. भ्रामक पोस्ट शेयर करने वालों पर सीधे नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी.
इमामबाड़ा कमेटियों और धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर रूट फाइनल
फ्लैग मार्च के दौरान स्थानीय नगर परिषद, सामाजिक संस्थाओं और इमामबाड़ा समितियों के प्रतिनिधियों ने भी पुलिस प्रशासन की कड़ियों को मजबूत किया. शांति समिति की बैठक के आलोक में सभी अखाड़ों और जुलूसों के समय व रूट (मार्ग) का सटीक निर्धारण कर लिया गया है ताकि यातायात बाधित न हो. स्थानीय व्यापारियों ने भी स्वेच्छा से उन व्यावसायिक मार्गों को खाली रखने का आश्वासन दिया है जहां से तजिया का जुलूस गुजरना है.मौके पर वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी रहे मुस्तैद
सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार ने दो टूक कहा कि मुहर्रम का पर्व सहिष्णुता, शोक और सह-अस्तित्व का प्रतीक है, जिसे सभी वर्ग आपसी सौहार्द से मनाते आए हैं. किसी भी आपातकालीन या अप्रिय घटना की सूचना देने के लिए थाना नियंत्रण कक्ष को पूरी तरह अलर्ट रखा गया है.