बिहार में 21 जून को आयोजित नीट यूजी परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मोतिहारी और दरभंगा में परीक्षा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों की हैंडलिंग में बड़ी चूक सामने आई है. प्रश्न पत्र और ओएमआर शीट को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा समाप्त होने के बाद सीलबंद बक्सों को एयरपोर्ट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी डाक विभाग को सौंपी गई थी. इसके लिए पोस्टल अधीक्षक को नोडल अधिकारी बनाया गया था.मामला तब गंभीर हो गया जब मोतिहारी के पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित कलेक्शन सेंटर में रखे गए स्टील बॉक्स के एक हिस्से को कथित तौर पर नियमों के विपरीत तोड़ दिया गया. इससे भी बड़ी बात यह रही कि ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीलबंद कर एयरपोर्ट नहीं भेजा गया. जानकारी सामने आने के बाद डाक विभाग में हड़कंप मच गया है.जांच के लिए मोतिहारी पहुंचे सहायक निदेशक
पूरे मामले की जांच के लिए मुजफ्फरपुर डाक प्रमंडल से सहायक निदेशक राहुल रंजन को मोतिहारी भेजा गया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. जांच रिपोर्ट विभागीय मुख्यालय को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.
इस बीच कार्बन कॉपी को 48 घंटे बाद मंगलवार सुबह सीआरपीएफ और पारा मिलिट्री की निगरानी में सड़क मार्ग से दिल्ली भेजा गया है.
एयरपोर्ट पर पकड़ी गई गड़बड़ी
सूत्रों के अनुसार, दरभंगा में परीक्षा के बाद सीलबंद ओएमआर शीट एयरपोर्ट पहुंचाने की जिम्मेदारी जिस अधिकारी को दी गई थी, उसने स्वयं जाने के बजाय एक इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को भेज दिया. एयरपोर्ट पर तैनात अधिकारियों ने उसे वापस लौटा दिया.
वहीं, मोतिहारी से भेजे गए स्टील बॉक्स की जांच के दौरान पटना एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने पाया कि बॉक्स का कब्जे वाला ताला टूटा हुआ है. इसके बाद तत्काल आपत्ति दर्ज कर विभागीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद जांच टीम गठित की गई.कार्बन कॉपी भेजने में भी हुई चूक
नीट परीक्षा के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार परीक्षा समाप्त होने के बाद ओएमआर शीट को पिंक लिफाफे में छात्रों के सामने सील किया जाना था. दो छात्रों के हस्ताक्षर लेने के बाद उसे सुरक्षित रखा जाना था.
इसके अलावा ओएमआर की कार्बन कॉपी को उपस्थिति रजिस्टर से मिलान कर केंद्राधीक्षक के कक्ष में नीले लिफाफे में सील करना अनिवार्य था. बाद में दोनों लिफाफों को स्टील बॉक्स में रखकर सुरक्षा बलों की निगरानी में एयरपोर्ट भेजना था.
लेकिन मोतिहारी में कार्बन कॉपी को स्टील बॉक्स में रखा ही नहीं गया. यही वजह है कि उसे बाद में अलग से दिल्ली भेजना पड़ा.
दागी अधिकारी को ही मिली जिम्मेदारी
सूत्रों का दावा है कि जिस अधिकारी की भूमिका इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है, उसी को कार्बन कॉपी दिल्ली पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी गई. बताया जाता है कि उस अधिकारी के खिलाफ समस्तीपुर में पदस्थापन के दौरान सीबीआई द्वारा पहले भी प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है.