SUPAUL NEWS:सुपौल जिले के प्रतापगंज थाने से एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां थाना परिसर से ही जब्त सामान चोरी करने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। खुद कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियां उड़ा रहे थे। दरअसल, पिछले कई महीनों से पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से थाने के मालखाने में जमा प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप को नशे के आदी ग्राहकों को चोरी-छिपे बेचा जा रहा था।
मामले की गुप्त शिकायत डीजीपी से होने के बाद सुपौल एसपी द्वारा गठित विशेष त्रि-सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में यह गड़बड़झाला उजागर हुआ। इसके बाद तत्काल प्रभाव से प्रतापगंज थानाध्यक्ष पुअनि धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया। वहीं, सोमवार रात मामले में संलिप्त चार अन्य पुलिसकर्मियों — चौकीदार राहुल कुमार, अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और डायल 112 के चालक अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर मंगलवार सुबह न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है। हालांकि, पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने काफी गोपनीयता बरती।
6162 बोतल कफ सिरप मालखाने से गायब
प्रतापगंज थाने में जारी अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), सुपौल की अध्यक्षता में एक त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। इसमें वीरपुर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार और पुलिस उपाधीक्षक (साइबर), सुपौल गौरव गुप्ता शामिल थे। 11 जून को सौंपी गई संयुक्त जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हुए हैं।
कांड संख्या-216/25 में कुल 7560 बोतल कोडीन कफ सिरप जब्त किया गया था। अनुसंधानकर्ता द्वारा आठ बोतल एफएसएल जांच के लिए भेजने के बाद मालखाने में 7552 बोतलें होनी चाहिए थीं, लेकिन मौके पर मात्र 1390 बोतलें ही पाई गईं। यानी 6162 बोतल कफ सिरप गायब कर बेच दिया गया।
पकड़े जाने के डर से बदला स्टॉक
गायब स्टॉक को छिपाने के लिए मालखाने में 2842 बोतलें ऐसी रखी मिलीं, जो वर्ष 2026 में निर्मित थीं। यह स्टॉक जब्ती सूची में दर्ज ब्रांड और बैच नंबर से पूरी तरह अलग था। इससे साफ है कि हेरफेर छिपाने के लिए नया माल रखा गया था।
जांच में यह भी पाया गया कि थानाध्यक्ष द्वारा पूर्व में जब्त किए गए ट्रैक्टर का डायनमो, टायर और बैटरी तथा एक टोटो की बैटरी बेच दी गई। पूछने पर थानाध्यक्ष ने इस संबंध में पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की। 6 मई को लूट कांड से जुड़ी एक अपाचे बाइक थाना लाने के बावजूद थानाध्यक्ष द्वारा उसे छोड़ दिया गया। थानाध्यक्ष पर कांड के शमन का आरोप सत्य पाया गया है और उनके अभिलेख संधारण में गंभीर त्रुटियां मिली हैं।
पकड़े जाने के डर से सीसीटीवी फुटेज किया डिलीट
जब जांच समिति ने थाने के सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की तो पता चला कि थाना परिसर के मुख्य कैमरे का 28 मई से पहले का पूरा फुटेज डिलीट कर दिया गया है, ताकि कोई सबूत हाथ न लगे। जांच समिति ने थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार के इस कृत्य को घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण का परिचायक मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, सुपौल निर्धारित किया गया है।