बिहार सिटी न्यूज़ संवाददाता, सहरसा। पुलिसिंग व्यवस्था को और भी व्यवस्थित करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने जिले के थानों को गोद लेने की नई पहल। इसके तहत वरीय पुलिस पदाधिकारी अलग-अलग थानों की निगरानी करेंगे और उनकी कार्यप्रणाली को माडल थाना के अनुरूप बनाएंगे।
डीआइजी ने सदर थाना को लिया गोद
कोसी रेंज के डीआइजी डॉ. कुमार आशीष ने सबसे पहले सदर थाना सहरसा को गोद लिया है। उनका कहना है कि इस पहल से थाने में व्याप्त समस्याओं का समाधान होगा और पुलिस कार्रवाई की गति तेज होगी। आम जनता को समय पर न्याय मिलने में भी मदद मिलेगी।
इस पहल के तहत थाने के कामकाज की निरंतर निगरानी की जाएगी। अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि थाने का कार्य पुलिस मुख्यालय की गाइडलाइन के अनुसार हो। यदि कोई कमी होगी, तो तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
थाने के सभी कामकाज पर नजर
डीआइजी थाने के दैनिक पंजी, गुंडा रजिस्टर, कांड अनुसंधान की स्थिति, फरार और वारंटियों के खिलाफ कार्रवाई, थाने की साफ-सफाई और आम जनता के साथ पुलिस पदाधिकारियों के व्यवहार की निगरानी करेंगे। अधिकारी थाने में नियमित बैठक कर कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करेंगे।
अन्य अधिकारियों को भी थाने गोद लेने का निर्देश
एसपी, एसडीपीओ और पुलिस उपाधीक्षक को भी अपने-अपने कार्यक्षेत्र के थानों को गोद लेने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी थाने माडल थाना की तरह काम करें और जनता की शिकायतों का समय पर निवारण हो।
जनता में बढ़ी उम्मीद लहर
सदर थाना को डीआइजी द्वारा गोद लेने की खबर से स्थानीय लोगों में उत्साह की नई उम्मीद। लोग मानते हैं कि इससे थाने में लापरवाही और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। आम जनता को पुलिस से समय पर और उचित सेवा मिलने की संभावना बढ़ेगी।
30 मई को निरीक्षण करने का पत्र जारी
डीआइजी ने 30 मई को सदर थाना का निरीक्षण करने का पत्र जारी किया है। निरीक्षण के दौरान थाने की कार्यप्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। थाने के अधिकारियों को सुधारात्मक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे ताकि कार्यकुशलता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
थाने में सक्रियता
डीआइजी के निर्णय के बाद थाने के अधिकारी अपने कार्यों को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से करने में जुट गए हैं। रजिस्टर, कांड अनुसंधान, फरार अभियुक्तों और वारंटियों के मामलों की समीक्षा के साथ-साथ थाने की सफाई और जनता के साथ बेहतर संवाद पर ध्यान दिया जा रहा है।
पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
इस पहल से न केवल पुलिस कार्यकुशलता बढ़ेगी बल्कि जनता और पुलिस के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। यदि थानों को गोद लेने की प्रक्रिया सफल रही, तो यह अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी।
माडल थाना की तरह पूर्ण व्यवस्थित करने की कोशिश
सदर थाना सहरसा को गोद लेने की यह पहल पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लगातार निरीक्षण और निगरानी के माध्यम से थाने की कार्यप्रणाली को माडल थाना की तरह व्यवस्थित करने की कोशिश की जाएगी। जनता को सुरक्षा और न्याय की बेहतर सुविधा मिलेगी, और थाना स्तर पर जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।