वैशालीः समाज में यह प्रथा है कि पिता की अर्थी को केवल बेटा कंधा देता है, लेकिन वैशाली जिले में यह परंपरा को बदला गया. बेटा नहीं होने पर बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया. पांच बेटियां पिता की अंतिम यात्रा में श्मशाम गईं और पूरे रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया. परंपरा तोड़कर बेटियों ने समाज में एक अलग सन्देश दिया है. उन्होंने कहा कि- ‘जब औरत भगवान राम को जन्म दे सकता है, तो पिता की अर्थी को कंधा क्यों नहीं दे सकती
वैशाली थाना क्षेत्र नया टोला गांव की घटना है. जहां तारिणी प्रसाद सिंह का निधन हो गया. उनके परिवार में पांच बेटियां और पत्नी ललिता देवी हैं. बेटा नहीं होने के कारण निधन के बाद कंधा देने और अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस था. लेकिन पांचों बेटियों ने आगे आकर पिता की अर्थी को कंधा दिया और पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया. पूनम सिंह, नीलम सिंह, माधुरी, माला और चांदनी ने अपने पिता के अंतिम संस्कार में कंधा दिया. यह दृश्य देखकर गांव में मौजूद हर शख्स भावुक हो गया.
परिवार में नहीं है बेटा था
घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. माधुरी सिंह ने कहा कि- ‘हम पांच बहनें हैं, हमारा कोई भाई नहीं है. पिता के निधन पर हम इसलिए कंधा दिए कि लोग लड़की को कमजोर समझते हैं. समाज में लड़के को ज्यादा महत्व दिया जाता है. लोगों को लगता है कि लड़का से ही दुनिया चलती है और लड़की कुछ नहीं कर सकती, लेकिन लड़के को जन्म देने वाली भी एक औरत ही होती है. उन्होंने आगे कहा कि- ‘एक लड़की मां का रूप लेती है और बच्चे को जन्म देती है. जब एक औरत भगवान राम को जन्म दे सकती है तो हम लोग पिता को कंधा क्यों नहीं दे सकते? पिताजी ने हम पांचों बहनों को पढ़ाया-लिखाया, शादी-ब्याह कर अपना कर्तव्य निभाया. आज हम बहनें उनके अंतिम समय में कंधा देकर अपना फर्ज निभा रही हैं.
बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं होता’ मृतक की बेटी माधुरी क्या बोलीं?
माधुरी ने बताया कि इसके माध्यम से वे समाज में यह संदेश देना चाहती हैं कि लड़की को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए. ‘समाज में लड़का-लड़की में भेदभाव किया जाता है. हम पांचों बहन मिलकर पिता को कंधा देकर समाज को आईना दिखाने का काम किया है ताकि भेदभाव कम हो सके. लड़की कभी कमजोर नहीं है, लड़की चाहे तो कुछ भी कर सकती है. नया टोला की इन बेटियों ने साबित कर दिया कि बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं होता. फर्ज निभाने का जज्बा हो तो बेटियां भी किसी से कम नहीं.’