बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि दुग्ध उत्पादक किसानों के सहकारी संगठन - सुधा डेयरी प्रोजेक्ट - के माध्यम से दूध का उत्पादन 40 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर सवा करोड़ लीटर रोज किया जाए। सम्राट चौधरी ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता जन कल्याण है और सरकार किसानों, पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। हालांकि, 21वीं पशुगणना रिपोर्ट से यह पता चला है कि राज्य में दुधारू मवेशियों की संख्या में 10 फीसदी तक कमी आ गई है।
मुख्यमंत्री चौधरी ने रविवार को लोक सेवक आवास में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षा की और पदाधिकारियों को कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कॉम्फेड के माध्यम से राज्य के पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु-गाय, भैंस, बकरी उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें महिला पशुपालाकों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दूध उत्पादन तिगुना करने का आदेश दिया है। सीएम ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि सुधा केजरिए दूध का उत्पादन 40 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर सवा करोड़ लीटर रोज करें।
दुधारू पशुओं की संख्या दस फीसदी तक घटी: पशुगणना रिपोर्ट
बिहार के लोगों की पशुपालन में रुचि घट रही है। इस वजह से पिछले छह साल में राज्य में दुधारू पशुओं में 10 फीसदी तक कमी हो गई है। हालांकि राज्य में बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ दूध उत्पादों की खपत में वृद्धि हुई है, लेकिन दुधारू पशुओं की संख्या में कमी चिंताजनक है। प्रदेश में पिछली पशुगणना के मुकाबले गाय की तादाद में 2.61 फीसदी कमी आयी है। 2025 में हुई 21वीं पशुगणना की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। वैसे आधिकारिक रूप से इस पशुगणना रिपोर्ट को अभी जारी होना बाकी है।
एक तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बिहार में दूध उत्पादन तिगुना बढ़ाने की अपील कर रहे हैं तो दूसरी तरफ 21वीं पशुगणना रिपोर्ट से यह सामने आया है कि राज्य में दुधारू पशुओं की संख्या में 10 फीसदी तक कमी आ गई है।
बिहार में मवेशियों की संख्या घटी; सम्राट चौधरी का निर्देश- तीन गुना बढ़ाएं दूध उत्पादन
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि दुग्ध उत्पादक किसानों के सहकारी संगठन - सुधा डेयरी प्रोजेक्ट - के माध्यम से दूध का उत्पादन 40 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर सवा करोड़ लीटर रोज किया जाए। सम्राट चौधरी ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता जन कल्याण है और सरकार किसानों, पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। हालांकि, 21वीं पशुगणना रिपोर्ट से यह पता चला है कि राज्य में दुधारू मवेशियों की संख्या में 10 फीसदी तक कमी आ गई है।
मुख्यमंत्री चौधरी ने रविवार को लोक सेवक आवास में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षा की और पदाधिकारियों को कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कॉम्फेड के माध्यम से राज्य के पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु-गाय, भैंस, बकरी उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें महिला पशुपालाकों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दूध उत्पादन तिगुना करने का आदेश दिया है। सीएम ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि सुधा केजरिए दूध का उत्पादन 40 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर सवा करोड़ लीटर रोज करे
मछली उत्पादन बढ़ाने का भी निर्देश
मुख्यमंत्री ने नेपाल एवं सीमावर्ती राज्यों के मछली के बाजार में बिहार के मत्स्य पालकों की मछली की पहुंच सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने मछली का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया।सम्राट चौधरी ने कहा कि मछली का उत्पादन नौ लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष सुनिश्चित कराया जाए। समीक्षा के दौरान विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने विभाग की विभिन्न योजनाओं तथा भावी कार्य योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह आदि थे।
राज्य में इससे पहले 2019 में हुई पशुगणना में गाय, भैंस और बकरी में 2 से 25 फीसदी तक वृद्धि दर्ज हुई थी। लेकिन इस बार इन तीनों दुधारू पशुओं की संख्या घट गई है। मुर्गा-मुर्गी की संख्या में 36 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। हाथी और ऊंट लुप्त होने के कगार पर हैं। राज्य में महज 27 हाथी और 30 ऊंट बचे हैं। भारत में पहली पशुगणना 1919 में हुई थी। प्रत्येक पांच वर्ष पर पशुगणना होती है। इस बार 8 हजार कर्मियों ने बिहार में 2 करोड़ 60 लाख 71 हजार घरों में जाकर पालतू पशुओं की गिनती की थी। जानकारों की मानें तो हालिया पशुगणना में गायों की संख्या में कमी की मूल वजह किसानों का पशुपालन से मोहभंग होना है।
अब हर दरवाजे पर गाय-भैंस नहीं दिखती, क्योंकि इन्हें पालना अब महंगा हो गया है। लागत के अनुरूप दूध से मुनाफा नहीं हो रहा। अलबत्ता डेयरी फार्म के जरिए गाय पालन का प्रचलन बढ़ा है और यह एक अच्छा संकेत है। बिहार पशु चिकित्सा संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीरेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि दुधारू पशुओं की संख्या में कमी आना राज्य के हित में नहीं है। यह चौकाने वाला है। हां, यह जरूर है कि लोग देसी गायों की तुलना में जर्सी और फ्रीजियन अधिक पाल रहे हैं। इसलिए सरकार लोगों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करें।