PATNA NEWS:- खुद को गन लाइसेंस देने पर घिरे पूर्व डीएम, विधान परिषद में उठा मामला; प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल - Bihar City News

Breaking News

Friday, July 24, 2026

PATNA NEWS:- खुद को गन लाइसेंस देने पर घिरे पूर्व डीएम, विधान परिषद में उठा मामला; प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल


हेडलाइन:

खुद को गन लाइसेंस देने पर घिरे पूर्व डीएम, विधान परिषद में उठा मामला; प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल

बिहार विधान परिषद में कैमूर के पूर्व जिलाधिकारी सुनील कुमार द्वारा कथित तौर पर अपने नाम शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाने का मामला जोरदार ढंग से उठा। एमएलसी संतोष कुमार सिंह ने सदन में कहा कि जून 2025 से दिसंबर 2025 के बीच अपने कार्यकाल के दौरान पूर्व डीएम ने अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं ही हथियार का लाइसेंस जारी कर लिया। उन्होंने इसे देश में अपनी तरह का पहला मामला बताते हुए लाइसेंस निरस्त करने की मांग की। अन्य सदस्यों ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की।

क्या डीएम खुद को शस्त्र लाइसेंस जारी कर सकता है?

आर्म्स एक्ट, 1959 और आर्म्स रूल्स, 2016 के तहत जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अधिकांश मामलों में लाइसेंसिंग अथॉरिटी होता है। हालांकि, कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो किसी डीएम को अपने ही आवेदन पर स्वयं निर्णय लेने की अनुमति देता हो। यदि कोई डीएम ऐसा करता है, तो इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला माना जा सकता है और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

प्रशासनिक कानून के सिद्धांत "Nemo judex in causa sua" (कोई व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता) के अनुसार, ऐसे मामलों में निर्णय किसी अन्य सक्षम अधिकारी द्वारा लिया जाना अधिक उचित माना जाता है।

किन परिस्थितियों में उठ सकते हैं सवाल?

यदि शस्त्र लाइसेंस जारी करते समय पुलिस सत्यापन, आपराधिक रिकॉर्ड की जांच, सुरक्षा मूल्यांकन या अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया हो, तो मामले की वैधता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। प्रशासनिक कानून यह भी कहता है कि निर्णय केवल निष्पक्ष होना ही नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखाई भी देना चाहिए।

गन लाइसेंस कैसे मिलता है?

शस्त्र लाइसेंस के लिए जिला लाइसेंसिंग प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करना होता है। इसके बाद पुलिस सत्यापन, चरित्र और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच, सुरक्षा खतरे या आवश्यकता का मूल्यांकन किया जाता है। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही लाइसेंस जारी या अस्वीकार किया जाता है। केवल सुरक्षा की मांग करना पर्याप्त नहीं माना जाता।

क्या हो सकती है कार्रवाई?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जिलाधिकारी भी एक सामान्य नागरिक की तरह शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है और उसे भी पूरी वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होता है। यदि यह साबित होता है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग किया, नियमों का उल्लंघन किया या निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन नहीं किया, तो मामला प्रशासनिक जांच और कानूनी कार्रवाई का विषय बन सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।