बिहार के सहरसा की एक अदालत ने न्याय के साथ-साथ समाज सुधार की एक अनोखी मिसाल पेश की है। - Bihar City News

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Wednesday, June 10, 2026

बिहार के सहरसा की एक अदालत ने न्याय के साथ-साथ समाज सुधार की एक अनोखी मिसाल पेश की है।


बिहार के सहरसा की एक अदालत ने न्याय के साथ-साथ समाज सुधार की एक अनोखी मिसाल पेश की है। शहर के चर्चित अफसर आलम हत्याकांड में जेल में बंद एक आरोपित को अदालत ने जमानत तो दे दी है, लेकिन जेल से बाहर रहने के लिए प्रायश्चित की कुछ बेहद दिलचस्प शर्तें भी रख दी हैं। अब इस आरोपित को न केवल भगवान के दरबार में सेवा करनी होगी, बल्कि पर्यावरण का कर्ज भी चुकाना होगा।यह पूरा मामला सहरसा सदर थाना क्षेत्र का है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे चतुर्थ) अविनाश कुमार की अदालत ने पिछले साल 25 दिसंबर से जेल में बंद आरोपित नंद किशोर यादव की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह अनूठा फैसला सुनाया। अदालत ने 10 हजार रुपये के मुचलके पर रिहाई का आदेश देते हुए आरोपित के सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी शर्तें लगाई हैं।अदालत की पहली शर्त के मुताबिक, आरोपित नंद किशोर यादव को अगले छह महीने तक स्थानीय मत्स्यगंधा मंदिर में हफ्ते में पांच दिन और रोजाना दो घंटे तक अपनी सेवा देनी होगी। वहीं दूसरी शर्त के तहत उसे एक महीने के भीतर किसी स्कूल, अस्पताल या अन्य सार्वजनिक जगहों पर 50 पौधे लगाने होंगे। इतना ही नहीं, पौधे लगाने के बाद इसका प्रमाणपत्र (Certificate) भी अदालत में पेश करना होगा।इन दो शर्तों के अलावा कोर्ट ने एक तीसरी शर्त भी जोड़ी है। इसके रूप में आरोपित को अगले एक साल तक हर महीने के पहले और तीसरे सप्ताह में अनिवार्य रूप से सदर थाना पहुंचकर अपनी हाजिरी लगानी होगी। दरअसल, सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि इसी मामले में नामजद अन्य सह-आरोपितों मो. इसराइल और रणबीर कुमार को पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) से पहले ही जमानत मिल चुकी है।

इसी आधार और मामले के तथ्यों को देखते हुए सहरसा की अदालत ने नंद किशोर को भी राहत दे दी। हालांकि, अदालत ने इस रियायत के साथ एक सख्त चेतावनी भी जोड़ी है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि यदि जमानत पर बाहर रहने के दौरान आरोपित भविष्य में किसी भी तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो अभियोजन पक्ष उसकी इस जमानत को रद्द करवाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा।